Tuesday, 29 November 2016

IND VS ENGLAND

India vs England: कोहली ने कहा, ओपनर का ऑप्शन हो सकते हैं पार्थिव

हाइलाइट्स

• आठ साल बाद भारतीय टेस्ट टीम में हुई पटेल की वापसी।
• पहली पारी में 42 और दूसरी में बनाई हाफ सेंचुरी।
• कोहली ने कहा, पार्थिव बन सकते हैं बैकअप ओपनर।
• पार्थिव के प्रदर्शन से खुश हैं कप्तान विराट कोहली।



मोहाली
पार्थिव पटेल की सकारात्मक बल्लेबाजी से कप्तान विराट कोहली काफी प्रभावित हैं और उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि दूसरे विकेटकीपर के अलावा गुजरात का यह खिलाड़ी बैकअप सलामी बल्लेबाज का विकल्प भी हो सकता है। के एल राहुल के चोटिल होने, गौतम गंभीर और शिखर धवन की खराब फॉर्म के कारण पार्थिव अब कप्तान के लिए एक और विकल्प बन गए हैं।

पढ़ें: चौथे दिन भारत की जीत में क्या रहा खास

पार्थिव ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में पारी की शुरुआत की तथा 42 और नाबाद 67 रन की दो अच्छी पारियां खेलीं। कोहली से पूछा गया कि क्या पार्थिव सलामी बल्लेबाज के रूप में राहुल के बैक-अप हो सकते हैं, उन्होंने कहा, 'वाह, ईमानदारी से कहूं तो यह अच्छा सिरदर्द है। आप कुछ नहीं कह सकते। सभी तरह की संभावनाएं हो सकती हैं। जिस तरह से दोनों पारियों में उसने बल्लेबाजी की वह शानदार था। यहां पर प्रथम श्रेणी मैचों में खेलने का अनुभव काम आता है। दोनों पारियों में अपनी बल्लेबाजी से उसने विरोधी टीम की रणनीति नाकाम कर दी। पूरा श्रेय उसे जाता है।'


उन्होंने कहा, 'पार्थिव ने एक बल्लेबाज और एक विकेटकीपर के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया। इसलिए आप कुछ नहीं कह सकते। देखते हैं कि अगले कुछ दिनों में क्या होता है और हम फिर उसी अनुसार फैसला करेंगे।'

Monday, 28 November 2016

Sahara Group

Sahara’s roadmap in SC proposes to pay over Rs 11K crores to SEBI

The group submitted the application, along with a payment plan, seeking approval of the apex court and for "absolute" release of Subrata Roy and two directors.


The group proposed to clear its liability in 21 installments in two-and-a-half years to ensure “absolute” release of its chief Subrata Roy. (Source: File)
The Sahara Group on Monday presented in the Supreme Court a road map for repayment of an outstanding amount of over Rs 11,136 crore to SEBI and proposed to clear its liability in 21 installments in two-and-a-half years to ensure “absolute” release of its chief Subrata Roy. The group submitted the application, along with a payment plan, seeking approval of the apex court and for “absolute” release of Roy and two directors Ashok Roy Chaudhary and Ravi Shankar Dubey once the amount is paid.

Sunday, 27 November 2016

कांग्रेस ने कहा- कल 'भारत बंद' नहीं, केवल विरोध-प्रदर्शन

PM के हमले से विपक्ष बैकफुट पर, कांग्रेस ने कहा- कल 'भारत बंद' नहीं, केवल विरोध-प्रदर्शन


नोटबंदी के खिलाफ भारत बंद के आह्वान पर पीएम मोदी द्वारा सवाल उठाए जाने पर कांग्रेस ने सफाई दी है. कांग्रेस ने साफ किया कि उसने कल ‘भारत बंद’ का आह्वान नहीं किया है, लेकिन नोटबंदी के मुद्दे पर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेगी. पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार का यह फैसला राजनीतिक कदम है जिसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के रूप में भुनाया जा रहा है.
पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘धमाका’ राजनीति में भरोसा रखते हैं और बड़े नोटों को बंद करने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि उन्हें उत्तर प्रदेश में कुछ संभावनाएं दिखाई दीं जहां अगले साल चुनाव होने हैं. उन्होंने दावा किया कि विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने के प्रधानमंत्री के बड़े चुनावी वादे को पूरा करने में सरकार की नाकामी को ढकने के लिए 1000 और 500 रुपये के नोटों को बंद किया गया था और मोदी कुछ 'नाटकीय' करना चाहते थे.
दरअसल भारत बंद का जेडीयू को छोड़कर तमाम पार्टियों ने समर्थन का ऐलान किया था, लेकिन अब कई पार्टियों ने  28 नवंबर को आक्रोश दिवस के रूप में मनाने का संकेत दिया है.  कांग्रेस और टीएमसी ने साफ कर दिया है कि वो सोमवार को भारत बंद के पक्ष में नहीं है, वो केवल नोटबंदी के खिलाफ में विरोध-प्रदर्शन करेंगे. इससे पहले भारत बंद का कांग्रेस, सपा, बसपा, टीएमसी, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी और आरजेडी द्वारा समर्थन करने की खबर आई थी. 
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक कदम है जिसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के रूप में बेचा जा रहा है. रमेश ने कहा कि अवैध तरीकों से धन जमा करने वाले लोगों को परेशानी नहीं हो रही है लेकिन उन लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है जिनके पास कालाधन नहीं है. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से जिन लोगों पर हमले की जरूरत थी, वे बचकर निकल गये. रमेश के मुताबिक 'सूट-बूट' वाले लोगों का एक वर्ग अब भी विलासिता की जिंदगी जी रहा है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने दावा किया कि भाजपा यह गलत जानकारी फैला रही है कि कांग्रेस और अन्य दलों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दल कल ‘जन आक्रोश दिवस’ मनाएंगे और देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे. मोदी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए रमेश ने कहा कि नौ नवंबर से आर्थिक गतिविधियां ठहर गई हैं. संसद में विपक्ष की रणनीति के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री चर्चा में हिस्सा लेते हैं तो चर्चा होगी.
उन्होंने नये नोट लाने में सरकार की तैयारी पर भी सवाल उठाया और कहा कि अनुमान के मुताबिक नये नोटों की छपाई में और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में 250 दिन लग सकते हैं. रमेश ने 'कैशलेस' या 'लेसकैश' समाज के प्रधानमंत्री के आह्वान की भी आलोचना करते हुए कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग दैनिक लेनदेन में नकदी का इस्तेमाल करते हैं.
उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजों में वक्त लगता है और झटके देकर इनके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. जब रमेश से पूछा गया कि कांग्रेस की सहयोगी जदयू के नेता नीतीश कुमार नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन के समर्थन में क्यों नहीं हैं तो उन्होंने कहा कि जदयू नेता शरद यादव इसका समर्थन कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि नोटबंदी के विचार के पीछे पुणे का जो संगठन है, उसने भी कहा है कि जिस तरीके से इसे लागू किया जा रहा है उस तरह का सुझाव उनका नहीं था.
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस कदम के मकसद के खिलाफ नहीं है और कालेधन तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ कदमों का समर्थन करेगी लेकिन हालात की हकीकत अलग है. उन्होंने कहा कि देश में केवल दो प्रतिशत लोग नकदीरहित लेनदेन करते हैं. देश को पूरी तरह कैशलैस बनाने में थोड़ा समय लगेगा. उन्होंने कहा कि 'साउंड बाइट्स' पसंद करने वाले प्रधानमंत्री 'कैशलेस या लेसकैश समाज' की बात कर रहे हैं, क्या वे नकदी रहित मंडिया भी चाहते हैं.
रमेश ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुमानों के हवाले से कहा कि देश की कुल जारी मुद्रा में केवल 0.02 प्रतिशत जाली नोट हैं. इसके लिए 80 प्रतिशत जनता को परेशान कर दिया गया है जिनमें किसान, असंगठित और लघु उद्यम क्षेत्र हैं. प्रधानमंत्री पर बड़े-बड़े दावे करने का आरोप लगाते हुए रमेश ने कहा कि एक कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए और खामियों की पड़ताल होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अनुमान है कि केवल 5 से 10 प्रतिशत कालाधन नकदी में रखा जाता है, वहीं अधिकतर इसे सोने, चांदी या बेनामी संपत्ति के रूप में अथवा विदेशों में रखा जाता है.
रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि 'न खाउंगा, न खाने दूंगा' लेकिन समझा जाता है कि तत्कालीन मोदी नीत गुजरात सरकार में मंत्री रहे सौरभ पटेल का नाता बहामास की एक कंपनी से था, जहां कई कर चोर जाते हैं.
'भारत बंद' से जेडीयू का किनारा 
जदयू ने अपनी राष्ट्रीय के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नोटबंदी का समर्थन किए जाने पर निर्णय लिया है कि वह इसके विरोध में विपक्ष के कल प्रस्तावित 'भारत बंद' और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा आगामी 30 नवंबर को पटना दिए जाने वाले धरना कार्यक्रम से अपने को अलग रखेगी.
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि हम लोगों ने केंद्र सरकार के नोटबंदी का जोरदार समर्थन किया है. नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा बुलाए गए 28 नवंबर को भारत बंद का जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने समर्थन नहीं करने का फैसला किया है और अपने आप को इस भारत बंद से अलग कर लिया है. जेडीयू की कोर कमेटी बैठक के बाद ही यह फैसला लिया गया है कि विरोधी दल के बुलाए गए भारत बंद में पार्टी शामिल नहीं होगी.
टीएमसी ने भी बदला अपना रास्ता
तृणमूल कांग्रेस ने नोटबंदी के खिलाफ वाम दलों द्वारा सोमवार 28 नवंबर को बुलाई गई 12 घंटे की हड़ताल का विरोध किया. वहीं वाम मोर्चे ने बंद को उचित ठहराते हुए कहा कि यह नोटबंदी के खिलाफ विरोध जताने के लिए आवश्यक है. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव सुब्रत बख्शी ने कहा कि वाम मोर्चा असल में नोटबंदी पर भाजपा की मदद करने की कोशिश कर रहा है इसलिए उन्होंने लोगों की परेशानियां बढ़ाने के लिए यह हड़ताल बुलाई है, उन्हें हड़ताल बुलाने से बचना चाहिए था.
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की कोर समिति की बैठक के बाद कहा कि 28 नवंबर को तृणमूल कांग्रेस नोटबंदी का विरोध करने के लिए कॉलेज चौक से एस्प्लनेड तक एक रैली निकालेगी. बख्शी ने कहा कि ममता दी ने हड़ताल के आह्वान पर निराशा जताई है और कहा है कि लोग हड़ताल एवं बंद का समर्थन नहीं करते. राज्य के परिवहन मंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनका विभाग बंद के दौरान सामान्य स्थिति कायम रखने के लिए 2600 और बसें चलाएगा. उन्होंने कहा कि बंद की अवधि के दौरान अगर कोई वाहन क्षतिग्रस्त होता है तो सरकार मुआवजा देगी. उधर, वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस ने हड़ताल को उचित ठहराते हुए कहा कि नोटबंदी से आम लोगों को परेशानी हो रही है और नोटबंदी के खिलाफ विरोध जताने के लिए हड़ताल का आह्वान आवश्यक है. उन्होंने कहा कि हमने बैंकों, एटीएम, स्वास्थ्य और दूध को हड़ताल के दायरे से अलग रखा है.

कश्मीर में मौसम की पहली बर्फबारी

कश्मीर में मौसम की पहली बर्फबारी: लेह में -3 और श्रीनगर में 0 हुआ टेम्परेचर




श्रीनगर. कश्मीर डिवीजन के ऊपरी इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई। घाटी और लद्दाख रीजन में रात का टेम्परेचर काफी नीचे चला गया है। लद्दाख में शनिवार रात -3 जबकि श्रीनगर में 0 डिग्री टेम्परेचर रिकॉर्ड किया गया। मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट के मुताबिक, शनिवार रात को द्रास, कारगिल, झांस्कर, गुरेज और कुछ अन्य ऊपरी इलाकों में बर्फबारी हुई। नॉर्थ कश्मीर के मशहूर स्की-रिसॉर्ट गुलमर्ग में बारिश भी हुई। टेम्परेचरमें 4-5 डिग्री की गिरावट...

- मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट के मुताबिक, "श्रीनगर में मिनिमम टेम्प्रेचर जीरो डिग्री रिकॉर्ड किया गया। कुपवाड़ा में 4 डिग्री सेल्सियस गिरावट दर्ज की गई। यहां -1.8 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर रिकॉर्ड किया गया।”
- कोकरनाग टेम्परेचर 2.9 जबकि काजीगुंड में ये 1.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
हिल रिसॉर्ट में भी टेम्प्रेचर जीरो से नीचे
- गुलमर्ग में शुक्रवार रात टेम्प्रेचर 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो शनिवार रात -0.8 डिग्री पर पहुंच गया।
- पहलगाम में पारा -1.0 पर जा पहुंचा है। इसमें करीब 5 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है।
- लद्दाख रीजन के लेह में रात का पारा -3.3 डिग्री तक जा पहुंचा है। शुक्रवार रात को यह 2 डिग्री था।
- इनके अलावा कारगिल में भी टेम्प्रेचार -1.8 डिग्री रहा।
कोहरे की घनी चादर बिछी
- घाटी में श्रीनगर समेत कई इलाकों में घना कोहरा छाया हुआ है।
- मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट के मुताबिक, अगले 24 घंटे में कश्मीर और लद्दाख के कुछ ऊपरी इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है।

Thursday, 24 November 2016

क्या आप अपने स्मार्टफोन का पासवर्ड भूल गए? ऐसे कर सकते हैं ओपन

क्या आप अपने स्मार्टफोन का पासवर्ड भूल गए? ऐसे कर सकते हैं ओपन


नई दिल्ली: अक्सर हम में से करीब-करीब सभी अपने स्मार्टफोन को लॉक करके रखते हैं। जब भी उसे यूज करते हैं तो पहले पासवर्ड डालते हैं तब फोन ओपन हो जाता है। ऐसा हम इसलिए करते हैं ताकि को भी हमारे फोन सेव सामग्री (फोटो, वीडियो, दस्तावेज इत्यादि) तक नहीं पहुंच पाये। लेकिन कभी-कभी हम अपने स्मार्टफोन के पैटर्न लॉक पासवर्ड को भूल जाते हैं। जब हम पार्सवर्ड भूल जाते हैं तो हम काफी परेशान हो जाते हैं। पर परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप नीचे बताये गए विधि से आप अपने स्मार्टफोन को ओपन कर सकते हैं।
1. सबसे पहले आप अपने स्मार्टफोन का स्विच ऑफ करें।
2. उसके बाद एक साथ फोन के वोल्यूम (volume) बटन, पावर बटन और स्क्रीन बटन को दबायें।
3. आपको मिलेंगे 5 ऑप्शन।
a. रिबूट डेटा (Reboot data)
b. वाइप डेटा/फैक्ट्री रिसेट (Wipe data/factory reset)
c. इंस्टॉल अपडेट (Install update)
d. पावर डाउन (Power down)
e. एडवांस ऑप्शन (Advance option)
4. वाइप डेटा/फैक्ट्री रिसेट बटन को सेलेक्ट करें और येस (yes) दबाएं (press)। लेकिन इसके पहले, इसे दो बार करें। क्योंकि एक बार आप yes सेलेक्ट करते हैं तो आपका सभी पहले का डेटा गायब हो जाएगा। आपको सलाह दी जाती है कि इस फंक्शन को शुरुआत करने से पहले अपने डेटा का बैकअप रख लें।
5. कुछ देर बाद, आपके फोन को रिस्टार्ट करना होगा। इस तरह आपका स्मार्टफोन आसानी से ओपन हो जाएगा और आप फिर से नया पैटर्न लॉक सेट कर सकते है। 

Saturday, 19 November 2016

नोट बदलवाने को लेकर PM मोदी का बीजेपी सांसदों को निर्देश- बैंकों, एटीएम के बाहर खड़े लोगों की मदद करें


P.M Modi's BJP MPS to-Banks, ATM's, standing outside to help.

नई दिल्‍ली : केंद्र सरकार की ओर से 500 और एक हजार रुपये के नोट का चलन बंद किए जाने के बाद बैंकों एवं एटीएम में कैश और नोट बदलवाने को लेकर लोगों को हो रही मुश्किलों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बीजेपी सांसदों को निर्देश जारी किया है।
पीएम मोदी ने लोकसभा और राज्‍यसभा के बीजेपी सांसदों को चिट्ठी लिखकर नोट बदलवाने संबंधी एक अहम निर्देश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि सभी सांसद नोट बदलवाने को लेकर जनता की मदद करें। बैंकों, एटीएम के बाहर खड़े लोगों की परेशानी को सुलझाएं। लोगों को नोटबंदी की वजह की जानकारी दें।
पीएम ने सांसदों से कहा है कि शनिवार, रविवार (इस दिन संसद की कार्यवाही नहीं चलती है) को लोगों की मदद करें। सभी सांसद शनिवार, रविवार को अपने क्षेत्रों में जाएं और जनता से मिलें। अपने क्षेत्रों में जाकर नोटबंदी के बाद परेशानी झेल रहे लोगों की मदद करें। साथ ही सभी सांसद अपने क्षेत्र में लोगों की इस बाबत समस्‍याओं को सुलझाएं।
गौर हो कि देश भर में बैंक और एटीएम के बाहर अभी भी कतारों की लंबाई में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है। लोग घंटों कतारों में खड़े हैं ताकि बंद हो चुके 500 और 1000 के पुराने नोटों के बदले मान्य मुद्रा हासिल कर सकें। पुराने नोटों के अचानक बंद होने से लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं क्योंकि वे नकदी की तंगी से परेशान हैं। नोटबंदी के बाद नौंवे दिन भी बैंक शाखाओं और एटीएम के बाहर बड़ी संख्या में लोग कतारों में लगे हैं। अधिकतर एटीएम में या तो नकदी नहीं है या उनमें नकदी जल्दी खत्म हो जाती है। लोगों को सरकार की ओर से तय अधिकतम 2500 रुपये की नकदी निकासी के लिए भी एक-दो घंटे कतार में गुजारने पड़ रहे हैं।

Thursday, 17 November 2016

How Ban On 500 And 1,000 Rupee Notes Could Hit Uttar Pradesh Election

How Ban On 500 And 1,000 Rupee Notes Could Hit Uttar Pradesh Election


NEW DELHI: 

HIGHLIGHTS

  1. Ban on notes give BJP an advantage in Uttar Pradesh: experts
  2. BJP has more workers, better organized, relies on less cash than rivals
  3. Other parties say big rallies will be replaced by door-to-door campaigns
 Prime Minister Narendra Modi's shock ban on high-value bank-notes will give his party, the BJP, the advantage in the election in Uttar Pradesh next year, according to some opposition leaders and analysts.

"We will have to plan the entire election strategy all over again," said Pradeep Mathur, a senior Uttar Pradesh leader of the Congress, alleging that with 500 and 1,000 rupee notes banned, the party will have to hold smaller rallies and there will be fewer "freebies" for voters.

His comments reflect a view that the BJP, with more members than its rivals and allegedly close ties to big corporate donors, can survive the cash crunch better, helping it win Uttar Pradesh, which is  crucial to PM Modi's plan for re-election in 2019.

According to the Delhi-based Centre for Media Studies (CMS), which tracks campaign financing, the BJP relies on cash for less than two-thirds of its funding in a state like Uttar Pradesh. Regional parties, on the other hand, like the Samajwadi Party or Mayawati's Bahujan Samaj Party are believed to use cash to cover 80 to 95 percent of campaign spending.

"Their calculation is that this is going to hurt everybody, but in relative terms the BJP is going to come out stronger," said Milan Vaishnav, a South Asia expert at the Carnegie Endowment for International Peace in Washington.

With no state election funding, illicit cash is the unacknowledged lifeblood for political parties that collect money from candidates and businessmen, and then spend it to stage rallies, hire helicopters and hand out "gifts" to win votes.

PM Modi's demonetisation drive, introduced suddenly last week, has so far proven popular among increasingly aspirational voters who are tired of corruption, although views among the broader population and economists are divided over the efficacy and fairness of the move.

Opposition politicians have united to attack the government over the long lines that have formed at banks to change small amounts of old money for new notes. They also alleged in parliament yesterday that big businessmen and some BJP officials were given notice of the ban, a charge the government emphatically dismissed as baseless.


Mayawati, the powerful former Chief Minister of Uttar Pradesh says the demonetisation timing appeared highly political. For decades, other parties have accused her of hoarding "black" money garnered from selling tickets to candidates to fund her campaign. One senior official and a close aide to Mayawati told Reuters that some of her party's rallies would be axed and replaced by more door-to-door campaigning." Last month ... we had to bring over 300,000 villagers from across UP to Lucknow city for a day ... It's not just us, but every political party spends money at grassroots level to win votes," the official said.

Ashok Agarwal, a politician with the incumbent Samajwadi Party in the city of Mathura, said he will have to rely more on his team of 1,000 volunteers to connect with voters. In a bid to limit the squeeze, parties are paying workers to queue at banks and swap old notes for new ones and evade scrutiny from tax inspectors, said workers from different parties in the city, according to Reuters.

Event managers, whose businesses usually boom at election time, are worried.

"No political party except the BJP wants to organise big rallies before January. All of them depend on cash," said Rajesh Pratap, who has provided loudspeakers, outdoor air conditioners and security to party rallies for over a decade.

PM Modi has not explicitly linked demonetisation to a clean-up of electoral funding, but officials in his party, unnamed by Reuters, say rivals should have heeded his warnings earlier this year that he was serious about clamping down on "black" cash.

In the 2014 election, parties spent a record 37 thousand crore rupees, CMS estimated.

They have also long circumvented rules and learned to avoid using cash - parties get donors to acquire equipment for rallies directly, or local traders to buy gifts for would-be voters, such as mobile phone credits.